Followers
Monday, November 5, 2012
Sunday, November 4, 2012
Wednesday, October 31, 2012
Saturday, October 27, 2012
Saturday, October 20, 2012
Tuesday, October 16, 2012
Thursday, October 11, 2012
Monday, October 8, 2012
Thursday, September 20, 2012
Tuesday, September 11, 2012
मुझको अब तू माँ बना दो
अधरों का रस जी भर पी लो
उर के खिलौने से तुम खेलो
हवा बसंती , मेरी जुल्फों से लहरा दो
मक्खन सी काया को मेरी
अब जी भर कर सहला दो
आँगन में कोई फुल खिला दो
ओ मेरे साजन !
मुझको अब तू माँ बना दो
उर के खिलौने से तुम खेलो
हवा बसंती , मेरी जुल्फों से लहरा दो
मक्खन सी काया को मेरी
अब जी भर कर सहला दो
आँगन में कोई फुल खिला दो
ओ मेरे साजन !
मुझको अब तू माँ बना दो
Wednesday, August 22, 2012
Tuesday, July 24, 2012
अब बहारों की हो चली हूँ //
बहुत देर हो चुकी तुम्हारे
इंतज़ार में , अब बहारों की हो चली हूँ //
पहले तो तुम
लफ़्ज़ों के धागे और लवों की सुई से
हर जगह मेरा नाम टांक दिया करते थे
मेरी अदाओं को छोडो
मेरी मुस्कान पर तुम रोज सौ बार मरा करते थे //
कभी कड़ी धुप हूँ ,तो कभी गुनगुनी
मुझसे क्या खता हो गई
क्यों कर देते हो ,अब हर बात अनसुनी //
मैं मयखाने नहीं जाऊँगा ,ग़मों को मिटाने
दरख्तों ने मुझसे कहा है
अब नए पत्तों को उगाने के दिन आ गए हैं //
Wednesday, June 20, 2012
Monday, May 14, 2012
सावन को आने दो
मन भवरा क्यों मचल उठा है ,होकर भी यह बावन //
होठो से क्यों गीत निकलते, जो पहले सिले हुए थे
क्यों आग निकलता तन -मन से,जो पहले बुझे हुए थे
अंग-अंग क्यों हुआ है पागल ,जब से आया सावन
मन भवरा क्यों मचल उठा है ,होकर भी यह बावन //
झूले में उर का आँचल का उड़ना, लहराना गेसू का
हंसी शराब सी तेरे अधरों की, और लाली टेसू सा
लाजवंती बनी क्यों कामवंती,जब से आया सावन
मन भवरा क्यों मचल उठा है ,होकर भी यह बावन //
हर जगह अब मोर -मोरनी, हैं कानों में कुछ बतियाते
हर जगह अब शेर-शेरनी, क्यों नहीं शोर मचाते
ओ सावन के बादल , क्यों बना दिया मुझको रावण
मन भवरा क्यों मचल उठा है ,होकर भी यह बावन //
Tuesday, April 24, 2012
तेरा आँचल आवारा बादल
तेरा आँचल आवारा बादल ,पता नहीं कहाँ बरसेगा
यौवन के इस रसबेरी को पाने, कौन नहीं तरसेगा //
बूंद -बूंद मुस्कान होठों का, पता नहीं कब बन जाए ओला
वह होगा शूरवीर ही ,जो झेले तेरी आँखों का गोला
देख लाल -लाल होठों के फूल, तबियत मेरी बिगड़ रही
उर के इस मक्खन चखने, मन भवरा कब-तक तडपेगा //
सुरमई पवन हुई सुगन्धित ,और हुई सुवासित बगिया
कब होगा मधुर मिलन और कब मेरा बाहं बनेगा तकिया
हर मुस्कान एक झटका देती और हंसी गिराती बिजली
गेसू से गिरते झरने में ,दुबकी लेने कौन नहीं तडपेगा //
Saturday, April 14, 2012
भूख तो कम हुई ,प्यास बढती गई
Tuesday, April 10, 2012
ग़ज़ल -2012
तुमको पाकर , मैं चांदनी में नहा गया
मगर कमबख्त सूरज खफा क्यों हो गया //
आप आये थे ,रुमाल से मेरे अश्कों को पोछने
मगर आप खुद ही अश्क बहा कर चल दिए //
दूसरों को पढने में , भूल गया था मैं अपना चेहरा
आज आईने में,अपना चेहरा ही बदरंग नज़र आया //
आपको देखकर , रूमानी होना कोई गुस्ताखी तो नहीं
पास आने की कोशिश में, मैंने चलना सीख लिया //
मगर कमबख्त सूरज खफा क्यों हो गया //
आप आये थे ,रुमाल से मेरे अश्कों को पोछने
मगर आप खुद ही अश्क बहा कर चल दिए //
दूसरों को पढने में , भूल गया था मैं अपना चेहरा
आज आईने में,अपना चेहरा ही बदरंग नज़र आया //
आपको देखकर , रूमानी होना कोई गुस्ताखी तो नहीं
पास आने की कोशिश में, मैंने चलना सीख लिया //
Tuesday, April 3, 2012
भूख
Friday, March 30, 2012
Saturday, March 24, 2012
इतिहास
मैं
इतिहास की पुस्तकें नहीं पढता
बाबर और औरंगजेब का इतिहास जानकार
क्यों सा तीर मार लूंगा मैं //
हर सुबह / पहली किरण के साथ
जब पीछे मुड़कर देखता हूँ
अपनी जिंदगी .....
एक जीवंत इतिहास नज़र आती है //
और मुझे
अपना ही इतिहास पढना अच्छा लगता है
इसे पढ़कर
मैं रोज
कुपथ को छोड़
सही राह चुनने में लग जाता हूँ ..//
इतिहास की पुस्तकें नहीं पढता
बाबर और औरंगजेब का इतिहास जानकार
क्यों सा तीर मार लूंगा मैं //
हर सुबह / पहली किरण के साथ
जब पीछे मुड़कर देखता हूँ
अपनी जिंदगी .....
एक जीवंत इतिहास नज़र आती है //
और मुझे
अपना ही इतिहास पढना अच्छा लगता है
इसे पढ़कर
मैं रोज
कुपथ को छोड़
सही राह चुनने में लग जाता हूँ ..//
Monday, March 19, 2012
आपकी आँखें
इन्हें समंदर कहूँ या झील
देख इन्हें, खिल जाता दिल //
इन आखों का रंग है श्यामल
जैसी इसमें खिला कोई कमल //
ये काले बादल है नीला आसमान
देख इन्हें मैं हो जाता बेईमान //
देख इन्हें, खिल जाता दिल //
इन आखों का रंग है श्यामल
जैसी इसमें खिला कोई कमल //
ये काले बादल है नीला आसमान
देख इन्हें मैं हो जाता बेईमान //
Thursday, March 15, 2012
कहीं कर न दूँ कोई नादानी
Saturday, March 10, 2012
नज़र घुमा कर यूँ मुस्काना

तेरा नज़र घुमा कर यू मुस्काना
तेरी सासें गाए नया तराना
बिन मतलब मैं हुआ दीवाना //
कपोल तेरे हुए लाजवंती
अधरें तेरी हुई रसवंती
बात-बात पर यू शर्माना
बिन मतलब मैं हुआ दीवाना //
ताजमहल सी देह तुम्हारी
और मोती है ये उर का पसीना
बात-बात पर कमर लचकाना
बिन मतलब मैं हुआ दीवाना //
तेरी चुप्पी है मुझे सताती
चुप्पी में खलनायक लगती
छोडो भी अब गुर्राना
बिन मतलब मैं हुआ दीवाना //
Friday, March 9, 2012
आत्म-ज्ञान
Thursday, March 8, 2012
एक दुटे दिल की आवज
Sunday, March 4, 2012
प्यार की पिचकारी में छेद
Wednesday, February 29, 2012
सागर अब झील में बदला

एक अन्जाने अपरिचित पथ पर चलकर मैंने तुझको पाया
स्नेह,प्यार और कोमलता का , मिला है अनुपम छाया //
मन में तम का जो घेरा था ,वह उज्जवल प्रकाश में फैला
उथल-पुथल सागर सा मन ,अब विशाल शांत झील में बदला //
मारे कोई जब अब कंकड़ , उठती है मन में प्यार की उर्मियाँ
अब गीत लिखेंगी परोपकार के , मेरी यह पाँचों अंगुलियाँ //
Tuesday, February 28, 2012
प्रेम-हाइकु
Friday, February 24, 2012
फागुनी बयार
Saturday, February 18, 2012
महका दो मेरा घर-आँगन
Tuesday, February 14, 2012
तुम्हारे कपोल परागकणों से बने हैं
हैपी वैलेंटाइन डे
Friday, February 10, 2012
Wednesday, February 8, 2012
अनुभूति 5
Tuesday, February 7, 2012
आपकी मुस्कान
Friday, February 3, 2012
अनुभूति -४
Friday, January 27, 2012
मेरी अनुभूति -3
Saturday, January 21, 2012
तुम बिन कैसा बसंत
Friday, January 20, 2012
मैं तुम्हें हँसने क्यों कहता हूँ ?
Thursday, January 12, 2012
अपील -अन्ना को साथ देने वालों से
भ्रस्टाचार को जड़- विहीन करने से पहले ,तुम्हें सत्य पर चलना होगा
काम, क्रोध ,लोभ ,मोह के चुम्बक से तुम्हें स्वं को हरना होगा
बिगुल फुकने वाले हर नेता को , स्वं उन्हें बदलना होगा
जन-जन को समझाने से पहले , तुम्हें स्वं से लड़ना होगा //
"अयं निजः परो बेति" का बीस-फूल तुम्हें मुरझाना होगा
कदम-कदम ,हर मोड़-मोड़ पर , बिष का प्याला पीना होगा
हर शबरी के घर में जाकर , उसका फल भी चखना होगा
गाँधी बनने से पहले , पहले उन्हें तुम्हें पढना होगा //
काम, क्रोध ,लोभ ,मोह के चुम्बक से तुम्हें स्वं को हरना होगा
बिगुल फुकने वाले हर नेता को , स्वं उन्हें बदलना होगा
जन-जन को समझाने से पहले , तुम्हें स्वं से लड़ना होगा //
"अयं निजः परो बेति" का बीस-फूल तुम्हें मुरझाना होगा
कदम-कदम ,हर मोड़-मोड़ पर , बिष का प्याला पीना होगा
हर शबरी के घर में जाकर , उसका फल भी चखना होगा
गाँधी बनने से पहले , पहले उन्हें तुम्हें पढना होगा //
मेरी अनुभूति -2
Subscribe to:
Posts (Atom)
Popular Posts
-
बादलों के पीछे इन्द्रधनुष का प्रतिबिम्बित होना कमल के ऊपर भवरे का मचलना फूलों से लदकर कचनार की डाली का झुक जाना हरी दूब के उपर ओस ...
-
अनजान,अपरिचित थी तुम जब आई थी मेरे आँगन खोज रहे थे नैन तुम्हारे प्रेम ,स्नेह का प्यारा बंधन // जब आँगन में गूंजी किलकारी खिल उठे चहु ओर...
-
नीलगगन सी तेरी साडी गहने चमके जैसे मोती आओ प्रिय ,अब साथ चले हम बनके जीवन साथी // उपवन के फूलों सी जैसी खुशबू तेरे बालों की परागकणों से लद...
-
आह भी तुम, वाह भी तुम मेरे जीने की राह भी तुम छूकर तेरा यौवन-कुंदन उर में होता है स्पंदन पराग कणों से भरे कपोल हर भवरे की चाह तो तुम// छंद...
-
मैंने ख्वाहिशों के आसमान में अपने दिल की कूची से तुम्हारी मुस्कुराहटों का रंग लेकर इन्द्रधनुष बनाने की कोशिश की थी पर ... तुम...
-
गुम-शुम क्यों हो बैठी,गोरी चलो प्यार की फुलवारी में संभल कर चलना मेरे हमदम कहीं फंस न जाओ झाड़ी में // कर ना देना छेद कभी प्यार की इस पिच...
-
बादल बरसे घनन -घनन पायल बाजे छनन -छनन मस्त पवन में बार-बार ,तेरा आँचल उड़ता जाए देख तुम्हारा रूप कामिनी, कौन नहीं ललचाए // हर पत्ता बोले...
-
तुमको पाकर , मैं चांदनी में नहा गया मगर कमबख्त सूरज खफा क्यों हो गया // आप आये थे ,रुमाल से मेरे अश्कों को पोछने मगर आप खुद ही अश्...
-
आज फिर तुम्हारी पुरानी स्मृतियाँ झंकृत हो गई और इस बार कारण बना वह गुलाब का फूल जिसे मैंने दवा कर किताबों के दो पन्नों के भूल गया गय...
-
कई रंग देखे ,कई रूप देखे और देखें मैंने कितने गुलाब कई हंसी देखे,देखी कितनी मुस्कुराहटें मगर नहीं देखा तुमसा शबाब // (अपने मित्र अजेशनी...