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Friday, July 4, 2014

हम,तुम और गुलाब

आज फिर
तुम्हारी पुरानी स्मृतियाँ झंकृत हो गई
और इस बार कारण बना
वह गुलाब का फूल
जिसे मैंने
दवा कर
किताबों के दो पन्नों के
भूल गया गया था

और उसकी हर पंखुड़ियों पर
हम-दोनों के बीच
प्यार के गुफ्तगू लिखे थे  

2 comments:

  1. उम्दा रचना और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@मुकेश के जन्मदिन पर.

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  2. Start self publishing with leading digital publishing company and start selling more copies
    self publishing india

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