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Tuesday, February 7, 2012

आपकी मुस्कान


जिस तरह
बिन्दुओं से रेखा बनती है
जिस तरह
बूदों से सागर भरता है
उसी तरह
तुम्हारी हर मुस्कान से
मेरे दिल का गागर भरता है //

4 comments:

  1. बहुत बेहतरीन लिखा आपने ,लाजबाब प्रस्तुति,सुंदर पोस्ट
    NEW POST.... ...काव्यान्जलि ...: बोतल का दूध...

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  2. तुम्हारी हर मुस्कान से
    मेरे दिल का गागर भरता है /
    bahut achhe sir jee...
    it is very interesting to read your poems.

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  3. बबन जी सच है बिन्दुओं से रेखा तो बन जाती है,
    पर आज तक समझ नहीं आया,
    यह मुस्कान दिल में कैसे उतर जाती है।
    मुस्कान छोटी सी, दिल गागर बहुत बड़ी,
    एक मुस्कान से गागर फिर भी भर जाती है।
    खूबसूरत एवं सराहनीय रचना.......
    कृपया इसे भी पढ़े-
    नेता कुत्ता और वेश्या

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