
गुम-शुम क्यों हो बैठी,गोरी
चलो प्यार की फुलवारी में
संभल कर चलना मेरे हमदम
कहीं फंस न जाओ झाड़ी में //
कर ना देना छेद कभी
प्यार की इस पिचकारी में
कही छुट न जाए नमक
प्यार की इस तरकारी में //
मैं कब -तक रहूं अनाड़ी
देखकर तेरी भींगी साडी
हरदम रंग से भरा रखता हूँ
मैं अपनी प्यारी पिचकारी //
बेहद खुबसूरत व प्रभावी रचना|
ReplyDeleteबेहद खुबसूरत व प्रभावी रचना|
ReplyDeleteहोली है... छेद भरने के लिए... सुंदर रचना
ReplyDeleteखुबसूरत रचना.... प्रभावी
ReplyDeleteसौन्दर्य प्रधान रचना..
ReplyDeleteआभार ||
ReplyDeleteदिनेश की टिप्पणी : आपका लिंक
dineshkidillagi.blogspot.com
होली है होलो हुलस, हुल्लड़ हुन हुल्लास।
कामयाब काया किलक, होय पूर्ण सब आस ।।
sundar rachnaa Baban bhaai...
ReplyDeleteगुम-शुम क्यों हो बैठी,गोरी
चलो प्यार की फुलवारी में
In do panktiyon ne man moh liya.......
sundar hai ..... prem ras se bhari .....
ReplyDeletethanks .....
Anu ....
bahut sahi
ReplyDeleteati sunder
ReplyDeleteshandaar hai
ReplyDeletepyar ki pichkari me karna na kabhi chhed:))
ReplyDeleteप्यार के रंगों से भरी लगी आपकी रचना....
ReplyDeletewaah kamal hain ji
ReplyDeletehappy holi
Happy Holi..
ReplyDeleteवाह ! बहुत खूब... पिचकारी में छेद.... होली है..........
ReplyDeleteहम तुम पे मर मिटे तो ये किसका कुसूर है ?
ReplyDeleteआइना ले के हाथ में खुद फैसला करो,....
बबन जी,.. रंग बचा कर रखे पिचकारी में,होली में अभी देर है....
बहुत बढ़िया भाव अभिव्यक्ति,बेहतरीन रचना,...
NEW POST...फिर से आई होली...
NEW POST फुहार...डिस्को रंग...
Jeewan me Basant ka rang gholti pyari rachna.
ReplyDeletebahut sundar bhai ji !
ReplyDeletebahut sunder bhav dhnyawad
ReplyDeleteHappy Holi..
ReplyDeleteबहुत सुन्दर प्रस्तुति... बहुत बहुत बधाई...
ReplyDeleteवाह ! बेहद खुबसुरत रचना है.
ReplyDelete