
अनजान,अपरिचित थी तुम
जब आई थी मेरे आँगन
खोज रहे थे नैन तुम्हारे
प्रेम ,स्नेह का प्यारा बंधन //
जब आँगन में गूंजी किलकारी
खिल उठे चहु ओर कुमुदिनी
प्रेम का बंधन हुआ कुछ भारी
मनभावन,अनुपम मेरी सजनी //
उज्जवल,धवल,कमल सी कोमल
मख्खन सी फिसलन है उर में
जब सुर में गाए लव तुम्हारे
महक उठे धरा और अवनी//
कितनी अच्छी मेरी सजनी
तपती धूप से हमें बचाती
मधुमय यादों की छाया
सागर की लहरों सा झूमे
तेरी नाक की हमदम नथुनी //
कितनी अच्छी मेरी सजनी
तुम्हारी लम्बी काली जुल्फों से
ठिठोली करे पवन बसंती
मुस्कान तेरी है चन्द्र-किरण सी
तेरी हर बातें हैं रूमानी //
कितनी अच्छी मेरी सजनी
(चित्र मेरी पत्नी की है )
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ReplyDeleteधन्यवाद पाण्डेय जी भाभी जी पर इतनी सुन्दर रचना के लिए !
ReplyDeleteवाह वाह भ्राता श्री बहुत खुब ! नई नवेली दुल्हन के कोमल भावों को प्रगट करती आपकी ये बेजोड़ और अनुपम रचना !
ReplyDeleteअनजान, अपरिचित नैनो की बगिया में दिल कुछ यु खोया...
ReplyDeleteहमको कवि, शायर और न जाने किस किस रस में डुबो डाला....
The most beautiful and heartfelt lines said by a MAN --for his better half--Wife...
ReplyDeleteशुभकामनाएं।
ReplyDeleteकिसी अनजान से घर से लाकर सतह फेरों के बन्द्नो से बंधना ...जिसने जन्म से सबकुछ साथ गुजरा उस घर से अचानक हटना ...उन भावनाओ को फिर से अटूट बंधन में विश्वास के साथ बांधना इतना आसन नही शब्दों में ये सब जिम्मेवारी पुरुष की है ....की उसको आपने अन्दर विस्वास पैदा करने का समय दे ...आप की अच्छी भाव पुन रचना ...!!!!!
ReplyDeleteजय श्री कृष्ण...आप बहुत अच्छा लिखतें हैं...वाकई.... आशा हैं आपसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा....!!
ReplyDeleteइतनी सुन्दर रचना के लिए| धन्यवाद|
ReplyDeleteआप दोनों को शुभकामनायें।
ReplyDeleteखोज रहे थे...नैन तुम्हारे
ReplyDeleteअति सुंदर...!
तारीफ किसकी करू। आपकी रचना की या आपके मनोभावों की।
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर रचना...प्रत्येक पंक्ति अपनत्व की भावना से परिपूर्ण है..हर शब्द दिल से निकले हुए प्रतीत होते है..
ReplyDeleteबेहद सौम्य रचना... प्रेम के मनोभावों से परिपूर्ण अभिव्यक्ति....
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना है, शुभकामनाएं.........।
ReplyDeleteआपकी कविता पढ़ के मेरा शादी करना का मन हो गया है
ReplyDeletebahut hee sunder rachna...aur sunder bhabhi ji to hain hee.. saadar...
ReplyDeleteउज्जवल,धवल,कमल सी कोमल
ReplyDeleteमख्खन सी फिसलन है उर में
जब सुर में गाए लव तुम्हारे
महक उठे धरा और अवनी//
कितनी अच्छी मेरी सजनी. waah. dil jeet liya aapne.
sajni ki bhavnaaye yadi sajan ji ko malum hai to usse badhiya javan saati ho hi nahi sakta.
ReplyDeletebahut khubsurat
ReplyDeletebaban bhai sahib kavita aur bhabhi ka chitra dono bahut sunder ..........sajni vahi jo piya man bhaaye ...........
ReplyDeletewah wah mai kya tarif karu tarif ke liye to ap ne koi sabd hi nahi chhode,lajawab hai sir
ReplyDeleteSunder manobhav..... shubhkamnayen....
ReplyDeletebahut achha hai, bahut khoobsurat
ReplyDeleteप्रियतम द्वारा अपनी प्रियमवदा को आदरांजली..आप समाजिक पैरोकार के साथ सौंदर्य व्यखान में भी निपुण है..आपके साथ ही आपकी प्रेरणा को भी हमारा नमण..
ReplyDeleteतुम्हारी लम्बी काली जुल्फों से
ReplyDeleteठिठोली करे पवन बसंती
मुस्कान तेरी है चन्द्र-किरण सी
तेरी हर बातें हैं रूमानी //
कितनी अच्छी मेरी सजनी
बबन जी बहुत ही सुंदर रचना है , और आपकी श्रीमती जी भी बहुत ही प्यारी है, शुक्रिया सांझा करने के लिए..........:))
तारीफ के लिए सब्द नहीं है पर इतना जरुर कहूँगा कि आप कि कविता पढ़ने के बाद बहुत सारी पत्नीया गौरवान्वित महसूश करेंगी अति सुन्दरम
ReplyDeleteAti sundar kavita hai aap ki..jis bhav se aap ne likha hai...Bhabhi jee tik waisi hi dikhati hai....Bhagawan aap dono ko salamat rakhe
ReplyDeleteUgta hua suraj dua de aapko,
ReplyDeleteKhilta hua phool khushboo de aapko|
yahi dua dete hain aapko dost,
Ki denewala hazar khushiyan de aapko||
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bhabhi ji ko mera namaskar, aapne to 2011 me baten karna hi chor diye , kamse kam ek msg hi kar dete , aap ko msg 3-4 bar kiya lekin koi jawab nahi aaya, sayad naraj honge,
chati chhath ke subh awsar par aapko aur bhabhi ji ko subh kamnayen, chhath maata aapki mano kamna purna kare,
ReplyDeleteaapki kavita ke bareme kya kahun ...........
"la-jawab"
kya baat hai baban bhai ,aap jaise bandhu log apne jeevan me jeevan sathi se jeevan bhar prem kar ke apna jeevan safal kar lete hai ,,,,apko jeevan bhar ka prem mubarak ho aur ye prem jeevan bhar bana rahe
ReplyDeleteLazabaab Kriti :))))
ReplyDeletejai mata di
ReplyDeletebadhai sir
ReplyDeletebhabhi ji ki icha puri hui jo aap ne un par itni khoobsurat kavita likh dali
sundar rachna .rom rom prafulit ho gaya
ReplyDeletebahut sundar hai , sir jee/
ReplyDeletekaash ham par bhi koi aisee kavita likhta
भाव और रचना दोनों ही सराहनीय.......
ReplyDeleteकृपया इसे भी पढ़े-
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mujhe apne aapse kabhi kabhi rashq hota hai ki ye hunar mujh mein kyon nahin
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