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Tuesday, February 28, 2012

प्रेम-हाइकु


लचकती डालियाँ
और चटखती कलियाँ
अब लगाओ लो ,
मुझको गलबहियां //

बलखाती सी अँखियाँ
मीठी-मीठी बतियाँ
अब लगाओ लो ,
मुझको गलबहियां //

छम-छम बाजे पैजनियाँ
चाल जैसे दौड़े हिरनियाँ
अब लगाओ लो ,
मुझको गलबहियां //

12 comments:

  1. SIR,your poems are soft... natural .. and attractive... thanks/

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  2. बहुत सुन्दर भाई जी ....... अर्ज़ है ..ऐ सनम तेरी अदा कातिल सही मगर मेरी बन्दगी है तू .. नशे में चूर है तेरी आँखों की मस्ती जिससे झलकती वो सादगी है तू ..// बधाई !!

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  3. wow pandey ji apne prakrati or sunderta ka bahut accha tal mel prastut kiya

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    1. शुक्रिया ...
      माधवी मिश्र जी /
      नित्यानंद जी/
      प्रवीन पाण्डेय भाई
      प्रवीन द्विवेदी भाई /
      गौरव दुबे जी

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  4. mat pooch ke kaise kate hain din char wo teri judai ke
    har pal mein tujhko yaad kiya par kate na pal tanhai ke
    ab jab tu mere saamne hai to svar gunje shehnai ke
    par soch ke dil phir darta hai din char wo teri judai ke
    ........................................................
    .......................................................
    pandey ji aapki soch ke baad mujhe bhi kuch yaad aa gaya truti ho to muaf karna

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  5. बबन जी अच्छा लिखते हैं आप

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  6. मन के भावो को शब्द दे दिए आपने......

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  7. अच्छा हाइकु .

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