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Sunday, January 30, 2011

मेरे खुशियों की फैक्टरी


पुष्पित हूँ
पल्लवित हूँ
सुगन्धित हूँ
सुरभित हूँ
तरंगित हूँ
उत्साहित हूँ
गौरान्वित हूँ
उर्जान्वित हूँ
क्योकि.... तुम
मेरे खुशियों की फैक्टरी हो
और मुझमे ऊर्जा भरने वाली
एक मानवीय मशीन //

7 comments:

  1. बबन जी..बहुत खूब......बहुत बढ़िया रचना आपकी.......

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  2. क्योकि.... तुम
    मेरे खुशियों की फैक्टरी हो.....
    .बहुत खूब.
    .बहुत खूब.

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  3. बहुत सुन्दर रचना ! सचमुच नारि उर्जा श्रोत ही है इनकी मोजुदगी से हमारे जीवन मे उर्जा का संचार होता रहता है!

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  4. प्रेम से ओतप्रोत सम्बोधन।

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  5. यह बात सत्य है I हर सफल व्यक्ति के पीछे एक कुशल औरत का होता है, यह आपके कविता के रूप में ह्रदय से निकले उदगार भी प्रमाणित करते हैं I अत सुन्दर अभिव्यक्ति I

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  6. hmmmmm ..emotional ....
    very nice ....

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