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Friday, January 28, 2011

अनुरोध


सावन के बादलों
रुको यार ....
थोड़ी सी मेहरबानी करो
थोड़ी सी बरस लो
मेरे प्यार की गलियों में
सोख लो धूल
ताकि निकल सके वो
बिना परदे के
और मैं कर सकू
उनका हुस्ने दीदार //

7 comments:

  1. बेहतरीन ...।

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  2. आपने तो खुश कर दिया

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  3. बबन जी...बहुत खूब..............एक अच्छी और रूमानी फरमाइश ......सावन के बदलो से........

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  4. नाजुक.. जैसे नयी नवेली दुल्हन.

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  5. ताकि निकल सके वो
    बिना परदे के..........

    बहुत खूब...भाई जी...

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