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Wednesday, August 22, 2012
Tuesday, July 24, 2012
अब बहारों की हो चली हूँ //
बहुत देर हो चुकी तुम्हारे
इंतज़ार में , अब बहारों की हो चली हूँ //
पहले तो तुम
लफ़्ज़ों के धागे और लवों की सुई से
हर जगह मेरा नाम टांक दिया करते थे
मेरी अदाओं को छोडो
मेरी मुस्कान पर तुम रोज सौ बार मरा करते थे //
कभी कड़ी धुप हूँ ,तो कभी गुनगुनी
मुझसे क्या खता हो गई
क्यों कर देते हो ,अब हर बात अनसुनी //
मैं मयखाने नहीं जाऊँगा ,ग़मों को मिटाने
दरख्तों ने मुझसे कहा है
अब नए पत्तों को उगाने के दिन आ गए हैं //
Wednesday, June 20, 2012
Monday, May 14, 2012
सावन को आने दो
मन भवरा क्यों मचल उठा है ,होकर भी यह बावन //
होठो से क्यों गीत निकलते, जो पहले सिले हुए थे
क्यों आग निकलता तन -मन से,जो पहले बुझे हुए थे
अंग-अंग क्यों हुआ है पागल ,जब से आया सावन
मन भवरा क्यों मचल उठा है ,होकर भी यह बावन //
झूले में उर का आँचल का उड़ना, लहराना गेसू का
हंसी शराब सी तेरे अधरों की, और लाली टेसू सा
लाजवंती बनी क्यों कामवंती,जब से आया सावन
मन भवरा क्यों मचल उठा है ,होकर भी यह बावन //
हर जगह अब मोर -मोरनी, हैं कानों में कुछ बतियाते
हर जगह अब शेर-शेरनी, क्यों नहीं शोर मचाते
ओ सावन के बादल , क्यों बना दिया मुझको रावण
मन भवरा क्यों मचल उठा है ,होकर भी यह बावन //
Tuesday, April 24, 2012
तेरा आँचल आवारा बादल
तेरा आँचल आवारा बादल ,पता नहीं कहाँ बरसेगा
यौवन के इस रसबेरी को पाने, कौन नहीं तरसेगा //
बूंद -बूंद मुस्कान होठों का, पता नहीं कब बन जाए ओला
वह होगा शूरवीर ही ,जो झेले तेरी आँखों का गोला
देख लाल -लाल होठों के फूल, तबियत मेरी बिगड़ रही
उर के इस मक्खन चखने, मन भवरा कब-तक तडपेगा //
सुरमई पवन हुई सुगन्धित ,और हुई सुवासित बगिया
कब होगा मधुर मिलन और कब मेरा बाहं बनेगा तकिया
हर मुस्कान एक झटका देती और हंसी गिराती बिजली
गेसू से गिरते झरने में ,दुबकी लेने कौन नहीं तडपेगा //
Saturday, April 14, 2012
भूख तो कम हुई ,प्यास बढती गई
Tuesday, April 10, 2012
ग़ज़ल -2012
तुमको पाकर , मैं चांदनी में नहा गया
मगर कमबख्त सूरज खफा क्यों हो गया //
आप आये थे ,रुमाल से मेरे अश्कों को पोछने
मगर आप खुद ही अश्क बहा कर चल दिए //
दूसरों को पढने में , भूल गया था मैं अपना चेहरा
आज आईने में,अपना चेहरा ही बदरंग नज़र आया //
आपको देखकर , रूमानी होना कोई गुस्ताखी तो नहीं
पास आने की कोशिश में, मैंने चलना सीख लिया //
मगर कमबख्त सूरज खफा क्यों हो गया //
आप आये थे ,रुमाल से मेरे अश्कों को पोछने
मगर आप खुद ही अश्क बहा कर चल दिए //
दूसरों को पढने में , भूल गया था मैं अपना चेहरा
आज आईने में,अपना चेहरा ही बदरंग नज़र आया //
आपको देखकर , रूमानी होना कोई गुस्ताखी तो नहीं
पास आने की कोशिश में, मैंने चलना सीख लिया //
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तुमको पाकर , मैं चांदनी में नहा गया मगर कमबख्त सूरज खफा क्यों हो गया // आप आये थे ,रुमाल से मेरे अश्कों को पोछने मगर आप खुद ही अश्...
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