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Saturday, January 21, 2012

तुम बिन कैसा बसंत


मेरे दिल की धड़कन
मेरे होठों की बुलबुल
मेरे दिए की ज्योति
तुम कहाँ हो ... प्रिय!

लोग कहते हैं
बसंत आया हैं
तुम बिन कैसा बसंत प्रिय!
सुनो !
तुम जब तक नहीं आओगी
मैं ......
फूलों पर
परागों का निषेचन कर रहे
हर भवरे /हर तितली को
उडाता फिरूंगा //
(चित्र गूगल से साभार )

10 comments:

  1. कविता मेँ प्रेम पगी करुणा के रंग बिखर रहे है।
    बबन भाई इस सुंदर रचना के लिए बधाई।

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  2. मुक्त प्रेमालाप ............. सुंदर

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  3. मुक्त प्रेम की बहुत बढ़िया सुंदर रचना,
    new post...वाह रे मंहगाई...
    बबन जी मै तो पहले से आपका समर्थक हूँ,आप भी फालो करे तो मुझे खुशी होगी

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  4. तुम जब तक नहीं आओगी
    मैं ......
    फूलों पर
    परागों का निषेचन कर रहे
    हर भवरे /हर तितली को
    उडाता फिरूंगा //
    sir...ji,from where do u get this...thinking?

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  5. sundar bhav hain ....... Dr. Vinit Pandey

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  6. रंगों में तब रंग कौन भरेगा..

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  7. प्रेमालाप ..... इस सुंदर रचना के लिए बधाई।

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  8. सुन्दर भावमयी प्रस्तुति..

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  9. भावमयी प्रस्तुति..

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