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Sunday, September 1, 2013

गुलाब और तुम

कई रंग देखे ,कई रूप देखे
और देखें मैंने कितने गुलाब
कई हंसी देखे,देखी कितनी मुस्कुराहटें
मगर नहीं देखा तुमसा शबाब //
(अपने मित्र अजेशनी के लिए ,चित्र में फोटो उन्ही का है )

10 comments:

  1. आभार धीरेन्द्र भाई

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  2. बहुत खूब .... सुन्दर पंक्तियाँ ...

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  3. बेहतरीन भाव ... बहुत सुंदर रचना....

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  4. beauty lies in the eyes of beholder............

    सुन्दर रचना.

    अनु

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  5. खूबसूरती को महसूस करने के लिए दिल भी खूबसूरत चाहिए।

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