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Saturday, November 9, 2013

प्रेम हाइकु 2

महकाना  पुरे चमन  को
तुमसे सीखी हैं ये कलियाँ
रस से भरना स्वम को
तुमसे सीखी है  ये फलियां //

तुमने बनाया झरने को नीडर
पंख दे हवा को बनाया तूफ़ान 
हर दिल को तूने सींचा ऐसे 
बगिया हो चला है , रेगिस्तान// 

6 comments:

  1. महकाना पूरे चमन को
    तुमसे सीखी हैं ये कलियाँ
    रस से भरना स्वयं को
    तुमसे सीखी है ये फलियां //

    तुमने बनाया झरने को निडर
    पंख दे हवा को बनाया तूफ़ान
    हर दिल को तूने सींचा ऐसे
    बगिया हो चला है , रेगिस्तान//सुन्दर रचना है वर्तनी की अशुद्धियां संवार दी हैं। ठीक कर लें।

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  2. बहुत सुंदर .बेह्तरीन अभिव्यक्ति !शुभकामनायें.
    कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.
    http://madan-saxena.blogspot.in/
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    http://madanmohansaxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena69.blogsp

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  3. वाह... उम्दा भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

    नयी पोस्ट@ग़ज़ल-जा रहा है जिधर बेखबर आदमी

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  4. बेहतरूीन। मेरे नए पोस्ट पर आपका आमंत्रण है।

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  5. बेहतरूीन। मेरे नए पोस्ट पर आपका आमंत्रण है।

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