अमूमन ...
मुट्ठी पांच अँगुलियों से बनती है //
..
पर जब..
तुम रख देती हो
अपने पाँचों अंगुलियाँ
मेरी अँगुलियों पर
तब यह मुट्ठी
दस अँगुलियों की बनी होती है ..
जोश और ताकत से भरी //...
खिलते गुलाब सी
चेहरे वाली
चाँद सी दिखने वाली
हरश्रृंगार के फूलों सी
मुस्कुराने वाली
कमल के पत्तों सी
चिकनी त्वचा वाली
मोरनी सी चलने वाली
नवयौवना ....
कभी नागिन भी बन सकती है //
फिर भी मैं
उनके कसीदे गढ़ता रहूंगा
क्योकि ...
उनसे ही सृष्टी है ..//