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Tuesday, November 16, 2010

पदचिन्ह

क्यों न हम
भौतिकी का एक प्रयोग करें
लोहे को
चुम्बक से रगड़ो
उसमें आ जाता है
चुम्बकीय गुण ...//

हम भी चुम्बक
बन जायेगे
गर चलेगें
महापुरुषों द्वारा बनाई
पदचिन्हों पर ....//

Monday, November 15, 2010

२०साल पहले की बात याद आई .

आज जब समाचार पत्र में पढ़ा दिल्ली में एक मकान गिरने से ५० आदमी मर गए । तो लगा मैं भी दोषी हूँ एक सिविल इंजिनीयर होने के नाते ।
शुरू
-शुरू नौकरी लगी थी । मेरा एक मित्र दिल्ली की नौकरी छोड़ बिहार सरकार की नौकरी करने आया था । वह दिल्ली नगर निगम के अभियंत्रण सेल में था । एक टीम थी अभियंताओ की ,जिसमे वह भी था । उस टीम का काम वैसे मकानों को चिन्हित करना था , जो कमजोर हो चूके है और किसी भी क्षण गिर सकते है ।
मेरा मित्र बता रहा था कि बिहार सरकार में जो उसे मासिक वेतन मिल रहा है उसे वह दिल्ली नगर निगम के नौकरी में ५ दिनों में कमा लेता था । वस्तुतः वे लोग कमजोर मकान चिन्हित करते थे मगर मकान मालिक रूपये देकर उन्हें ऐसा करने से रोकते । शायद आज भी वही परंपरा पुरे जोर से चल रही हो ।
अब दोष किसका है आप स्वं जान सकते है .

Saturday, November 6, 2010

लोक आस्था का पर्व छठ

बिहार के जन- जन में लोक आस्था का चार दिवसीय पर्व छठ का बहुत ही महत्त्व है । सबसे बड़ी बात जो पर्व से जुडी है ...वह है शुद्धता और पवित्रता । शायद दुनिया में यही एक पर्व है जिसमे शास्वत सत्य सूर्य को जो कि पूरी दुनिया का संचालक है ,को उगते और अस्त होते समय अर्ध्य दिया जाता है ।

चार दिवसीय पर्व की शुरुयात पहले दिन "नहाय -खाय ' से की जाती है ...इस दिन ब्रत रखने वाले स्त्री-पुरुष गंगा -स्नान कर नए चूल्हे पर बनाया हुआ खाना खाते है । यह चूल्हा मिटटी से बनाया जाता है । इस दिन कद्दू खाने का बड़ा ही महत्त्व है ।
दुसरे दिन 'खरना ' होता है ..पुरे दिन ब्रत करने वाले ( स्त्री -पुरुष ) भूखे रहते है । शाम को नए चूल्हे पर प्रसाद बनाया जाता है । जो की जगह के अनुसार बदलता है । कही गुड का खीर बनता है ...तो कही अरवा चावल और चना का दाल ...ख़ास बात इसमें साधारण नमक नहीं डाला जाता ...इसमें सेंधा नमक का व्यवहार किया जाता है ।
सभी लोग एक दुसरे के यहाँ जाकर प्रसाद को ग्रहण करते है ।
तीसरे दिन पुनः ब्रत करने दिन भर भूखे रहते है .....तथा शाम को अस्त होते सूर्य को पानी में खड़े होकर अर्ध्य देते है । साथ ही सूप में नाना प्रकार के फलों को रखकर पूजा की जाती है ।
सूर्य के साथ साथ समझिये नदी की भी पूजा होती है ।
पुनः रात भर ब्रत करने वाले खाना नहीं खाते । सब रात -भर जागकर सूर्य -देव के उदय होने का इंतजार करते है । तथा सुबह में उदय्गामी सूर्य को अर्ध्य देकर यह पर्व समाप्त होता है ।

पहले जब मोटर गाडी नहीं होते थे तब लोग शाम को नदी तट पर अर्ध्य देकर रात्री में वही रहते थे ।
इस पर्व के अनेक लोग गीत है । सारे मीट मछली अंडे की दूकान बांध रहती है । युवकों द्वारा पुरे सड़क की सफाई और नदी की सफाई की जाती है । छठ के गीत बहुत ही कर्णप्रिय होते है । बिहार की लोकगायिका शारदा सिन्हा को छठ की गीत गाने और लोक गीत के कारण पद्म श्री मिला है

Wednesday, November 3, 2010

पटना

पाटलिपुत्र ...पटना का पुराना नाम है यह कभी मौर्य साम्राज्य ,मगध साम्राज्य ,नन्द साम्राज्य और शुंग सामरज्यकी राजधानी था पटना और आस-पास की खुदाई तो यही कहानी कहते है पटना शहर के अंदर बसा कुम्हरारऔर राजगीर ,नालंदा की खुदाई से तो यही प्रमाण मिलता है .....खैर मैं आपको पुराने पाटलिपुत्र की सैर नहींकराना चाहता
मैं आपको पटना -दर्शन कराना चाहता हूँ आइये पटना की हृदय -स्थली कही जाने वाली गाँधी -मैदान के पासखड़े हो जाए गांधी मैदान के पश्चिम "बिस्कोमान " भवन शायद पटना की सबसे ऊँची ईमारत है अभी हाल मेंबिस्कोमान भवन के उपर घूमता रेस्तरां खुला है ....बैठकर शहर का नज़ारा लीजिये इस भवन में नालंदा खुलाविश्व्विदय्लय का कार्यालय है साथ ही अन्य महतवपूर्ण कार्यालय है

गाँधी मैंदान के बिस्कोमान भवन से सटा है पटना का प्रसिद्द होटल मौर्या बाहर से आने वाले नेता अभिनेता यहीरुकते है वैसे होटल पाटलिपुत्र अशोक और होटल चाणक्य यहाँ के दुसरे अच्छे होटल में शामिल है

गांधी मैदान के पास ही है पटना का प्रसिद्द "गोलघर "....इसे अनाज का भण्डारण करने के लिए ब्रिटिश शाशन कालमें बनाया गया था ...कुछ ही दुरी पर है ..गांधी -संग्राहलय एक और महत्वपूर्ण ईमारत है " श्री कृष्ण मेमोरिअलहॉल "....यहाँ संगीत -उत्सव /कवि-गोष्ठी /प्रशिक्षण ईत्यादी का आयोजन किया जाता है

अशोक राजपथ ....जो गाँधी मैंदान से पटना साहिब (पटना सिटी ) की ओर जाती है ...उसमे पटना विश्व -विद्यालय
साईंस कालेज और अभियंत्रण कालेज ला कालेज है सबसे बड़ी बात इसी सड़क में गायघाट के पास सिखों के दशमेऔर अंतिम गुरु गोविन्द सिंह जी जन्म स्थली है यहाँ का प्रकाशोत्सव अपने आप में अनूठा होता है

Tuesday, November 2, 2010

चमक उठे हर दीप

तारों की लड़ी लगी है
चमक उठे हर सीप
तम का हार हुआ है
चमक उठे हर दीप ॥

भाग चला दरिद्रता
दिखाकर अपनी पीठ
लक्ष्मी के आने से
आनंदित है सब हित॥

आतिशवाजी के शोर से
गूंजने लगा चहुदिस
लक्ष्मी -गणेश जी आयेगे
घर -घर में नित ॥

Saturday, October 23, 2010

POLLUTION---Where's the solution

We see news daily in the newspaper like...
40 admitted in hospital due to jaundice
3 die due to lungs cancer
fishes die in mexico see due oil leakage in ship
90% readers ignore this news or not ponder on this sitution

All these problems aries due to pollution...or we the logic behind this...is pollution.
it makes our ecology dirty or infectious. it harms our atmosphere/ecology in many ways.....

(1) Black smokes emitting from industrial chimney contains large percentage of carban-dioxide ,carban mono oxide ,nitrogen dioxide ,sulphur dioxide etc।It causes air pollution , it mixes with air,we inhale or breath in this infected air ,our lungs get infected.

(2) excessive use of pesticide /fertiliser makes our surface ,subsurface and underground water polluted । It pollutes the potable and affects....our whole digestive system...and affects aqua animals.

(3)medical wastes also causes air and water pollution both.......(not complete

Tuesday, October 19, 2010

जाति के बिष-वृक्ष में अब फल लगने लगे है ...

अजीब बिडंवना है भारतीय संस्कृति के ....बेहतर तो यही था कि इसे छेड़ा ही न जाए । मगर हमारे राजनेताओ ने अपनी कुशार्ग बुद्धि से इस जाति -संस्कृति से खूब खेला और लोगो के मन /दिल और दिमाग कि उर्वर भूमि पर जाति के विष वृक्ष बोये ।
अब ये वृक्ष बड़े होकर फल देने लगे है । एक तरफ उनका नारा होता है ...जाति -तोड़ो ,देश बचाओ ....फिर दूसरी तरफ आयोग बनवाकर उनकी सामाजिक /आर्थिक अध्धयन कराया जाता है । एक बात समझ में नहीं ...कि आखिर आर्थिक आधार पर लोगो कि जाति बनाने में कौन सा रोड़ा बाधक है ।
मैं समझता था सिर्फ बिहार में जाति का रंग लोगो पर ज्यादा चढ़ा है । मगर आज जब अखवार देखा तो मेरे पावं
तले की ज़मीं खिसक गई । भाई सच में जाति का जो विष -वृक्ष नेताओं ने बोया है ...उसमे अब फल बड़ी तेजी से लग रहे है ।
कभी हिंदी के महान उपन्यासकार "मुंशी प्रेमचंद्र " ने पंच को परमेश्वर कहा था ।
गुजरात उच्च -न्यायालय में एक दलित ने याचिका देकर यह गुहार लगाई है कि उसका केश जिस जज के यहाँ है
वे ब्राह्मण है और वे मेरे साथ न्याय नहीं कर सकेगे अतः मेरा जज बदल दिया जाय । अखवार के अनुसार यह मामला मकवाना जिले का है । मित्रों यह महज एक मामूली समाचार नहीं है .....यह पुरे समाज कि मनो दशा को दिखलाती है कि किस कदर जाति का भुत लोगो के दिलों -दिमाग पर छा रहा है ।
हमारे समाजशास्त्रियो को इस ओर सोचना होगा ..और जाति का जो विष -वृक्ष फ़ैल रहा है ...उसे काटने कि दिशा में एक नए सिरे से प्रहार करना होगा ।
मेरा यह सोच कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दे .

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