Followers

Saturday, October 20, 2012

इन्द्रधनुष

अगर बूंदें न लटकती
आसमान में
तो इन्द्रधनुष ये कैसे बनता //


अगर तुम न आती
मेरे दिल में
तो जिंदगी ये कैसे चलता //

Tuesday, October 16, 2012

सोहबत


मैं रूपोश  में फिरता था , रुआब के लुट जाने से
आपकी सोहवत ने ,तो ,   मेरा रूतबा बढ़ा दिया //

आपकी चहलकदमी से, शबनम को शबाब आ गया
ज्योही रुख से नकाब हटा, सामने महताब आ गया //

(रुआब -- रोब , रूपोश - मुह छिपाने वाला , सोहबत -संगती ,शबाब - जवानी , महताब - चाँद)

Thursday, October 11, 2012

लस्सी


तुम्हारी बातें ..
आम के अंचार खाने जैसी लगती है
या फिर
ठेले पर बिक रही
गुपचुप और चाट खाने जैसा
कभी -कभी तुम्हारी बात
इडली और माशालदोसे
खाने जैसी लगती है //
और कभी-कभी
करेला का रस पीने जैसा //

ऐसा कभी नहीं लगा मुझे
तुमसे बाते कर
जैसे मै....
पी रहा होऊं
शहद और मकरंद की लस्सी

Monday, October 8, 2012

आओ ! खेलें प्यार-प्यार


प्यार डंक है
प्यार है पंख
आओ बजाएं प्यार का शंख //

प्यार नदी है
प्यार है झरना
फिर क्यों डरना //

प्यार आम है
प्यार है लीची
इसके खातिर तुम बन  जाओ दधिची //

प्यार जलेबी
प्यार है हलवा
सबको दिखाओ इसका जलवा /

Thursday, September 20, 2012

फूल और भंवरा


तुम मेरे पीछे क्यों पड़े हो !
कितना बेतुका सवाल पूछा तुमने
सवाल पूछने से पहले
तुम भूल गई ...
कभी तुमने मुझसे  कहा था
मैं फूल हूँ
और
तुम मेरे भंवरे //

Tuesday, September 11, 2012

मुझको अब तू माँ बना दो

अधरों का रस जी भर पी लो
उर के खिलौने से तुम खेलो
हवा बसंती , मेरी जुल्फों से लहरा दो
मक्खन  सी काया को मेरी
अब जी भर कर सहला दो
आँगन में कोई फुल खिला दो
ओ मेरे साजन !
मुझको अब तू माँ बना दो

Wednesday, August 22, 2012

ये हुस्न नहीं शराब है


Popular Posts