अधरों की लाली , अनार सी
और कमर , तेरी कचनार सी
यू ना बैठो गोरी
बांधों डोरी मुझसे प्यार की //
यू मुस्काती तुम ,जैसे गुलमोहर
देखने , नदियाँ भी जाती ठहर
चला दो मुझ पर छप्पन -छुरी
अंखियों के कजरारी धार की //
यू ना बैठो गोरी
बांधों डोरी मुझसे प्यार की //
बब्बन भाई संस्कृत साहित्य में प्राचीन कवियों ने मुग्धा ,मध्या ,प्रौढा नायिकोँ का नख शिख वर्रण किया है .अनेक रूपा नारि के स्तनों की तुलना -पीन -स्तनी (पीन्स्तनी ),पयोधर ,जंघाओं की केले के तने की मृसनता (लुनाई ,वेक्सिंग के बाद रोमहीन चिकनी जंघाएँ) ,यहाँ तक की जांघ के दराज़ के लिए भी उनके पास शब्दों के विविध पिरण लिए रूप हैं .आपका प्रयास स्तुत्य है .
अधरों की लाली , अनार सी और कमर , तेरी कचनार सी यू ना बैठो गोरी बांधों डोरी मुझसे प्यार की //
चला दो मुझ पर छप्पन -छुरी
ReplyDeleteअंखियों के कजरारी धार की //
great lines sir jee...
चला दो मुझ पर छप्पन -छुरी
ReplyDeleteअंखियों के कजरारी धार की //
great lines sir jee...
शुक्रिया माधवी , पढ़ती रहें
Deleteवाह ! ! ! ! ! बहुत खूब बबन जी,....
ReplyDeleteसुंदर रचना,बेहतरीन भाव प्रस्तुति,....
MY RECENT POST ...फुहार....: बस! काम इतना करें....
श्रंगार की छिटकन..
ReplyDeleteसौन्दर्य को दर्शाती बेहतरीन... प्रस्तुति...
ReplyDeleteप्रेम कि सुंदर अनुभूती को व्यक्त करती सुंदर अभिव्यक्ती....
ReplyDeleteअधरों की लाली , अनार सी
ReplyDeleteऔर कमर , तेरी कचनार सी
यू ना बैठो गोरी
बांधों डोरी मुझसे प्यार की
गहन अनुभूति प्रेम की. सुंदर प्रस्तुति
यू ना बैठो गोरी
ReplyDeleteबांधों डोरी मुझसे प्यार की...........sunder rachna.........
बेहतरीन रचना फलों को सम्मान देती हुई .
ReplyDeletethanks a lot veerubhai...
Deleteयू ना बैठो गोरी
ReplyDeleteबांधों डोरी मुझसे प्यार की /.........बेहतरीन एहसास दिया आपने बड़े भाई !
pravin bhai.. a basket of thanks.. for your comment
Delete....लाज़वाब अहसास...दिल को छूती बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
ReplyDeleteखूबसूरत प्रेम का अहसास कराती सराहनीय रचना.....
ReplyDeleteबब्बन भाई संस्कृत साहित्य में प्राचीन कवियों ने मुग्धा ,मध्या ,प्रौढा नायिकोँ का नख शिख वर्रण किया है .अनेक रूपा नारि के स्तनों की तुलना -पीन -स्तनी (पीन्स्तनी ),पयोधर ,जंघाओं की केले के तने की मृसनता (लुनाई ,वेक्सिंग के बाद रोमहीन चिकनी जंघाएँ) ,यहाँ तक की जांघ के दराज़ के लिए भी उनके पास शब्दों के विविध पिरण लिए रूप हैं .आपका प्रयास स्तुत्य है .
ReplyDeleteअधरों की लाली , अनार सी
और कमर , तेरी कचनार सी
यू ना बैठो गोरी
बांधों डोरी मुझसे प्यार की //
मनमोहक रचना, बधाई.
ReplyDeletelove is life .
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